केरल के एक गाँव की प्रेरणा
अध्यक्ष राजेश यादव ने जब सुना कि केरल के एक सुदूर गाँव में रोज़ाना राष्ट्रगान होता है, तो उन्होंने सोचा— "अगर एक गाँव यह कर सकता है, तो विश्व प्रसिद्ध शहर आगरा क्यों नहीं?" यहीं से तिरंगा चौक का बीज बोया गया।
हर महान आंदोलन की शुरुआत एक छोटे से विचार से होती है। 26 जनवरी 2018 (गणतंत्र दिवस) को आगरा के खेरिया मोड़, अजीत नगर बाजार में एक संकल्प लिया गया— एक ऐसा संकल्प जिसने इस सामान्य चौराहे को 'तिरंगा चौक' में बदल दिया।
अध्यक्ष राजेश यादव और अजीत नगर बाजार कमेटी के विज़न ने यह साबित कर दिया कि देशभक्ति केवल 15 अगस्त या 26 जनवरी का विषय नहीं है, बल्कि यह हमारे दैनिक जीवन और आचरण का हिस्सा होनी चाहिए।
एक सामान्य चौराहे को 'देशभक्ति के मंदिर' में बदलने के पीछे तीन मुख्य उद्देश्य और प्रेरणाएँ थीं, जिन्होंने इस विचार को हकीकत में बदला।
अध्यक्ष राजेश यादव ने जब सुना कि केरल के एक सुदूर गाँव में रोज़ाना राष्ट्रगान होता है, तो उन्होंने सोचा— "अगर एक गाँव यह कर सकता है, तो विश्व प्रसिद्ध शहर आगरा क्यों नहीं?" यहीं से तिरंगा चौक का बीज बोया गया।
राष्ट्रगान केवल राष्ट्रीय पर्वों तक सीमित न रहे। दिन की शुरुआत राष्ट्र के सम्मान (52 सेकंड) के साथ करने से समाज में देशभक्ति और अनुशासन की एक दैनिक आदत विकसित होती है।
बाजार एक ऐसी जगह है जहाँ हर धर्म, जाति और वर्ग के लोग आते हैं। 10:00 बजते ही जब सब एक साथ 1 मिनट के लिए थम जाते हैं, तो वह दृश्य 'अखंड भारत' का सबसे खूबसूरत उदाहरण बनता है।
कोई भी नया और बड़ा बदलाव आसानी से स्वीकार नहीं किया जाता। 2018 में जब अजीत नगर बाजार में रोजाना ट्रैफिक रोककर राष्ट्रगान कराने का प्रस्ताव रखा गया, तो इसके सामने कई बड़ी चुनौतियां आईं।
शुरुआत में ट्रैफिक पुलिस और स्थानीय प्रशासन ने रोज़ाना ट्रैफिक रोकने पर आपत्ति जताई। उन्हें लगा कि इससे जाम लगेगा। लेकिन कमेटी ने शांतिपूर्ण तरीके से समझाया कि यह केवल 1 मिनट (52 सेकंड) का देशभक्तिपूर्ण ठहराव है, जिससे कोई असुविधा नहीं होगी।
जब पूरी दुनिया में लॉकडाउन लगा और बाजार बंद हो गए, तब भी तिरंगा चौक का सायरन खामोश नहीं हुआ। सीमित लोगों और पूरी सोशल डिस्टेंसिंग के साथ राष्ट्रगान का यह महायज्ञ एक भी दिन के लिए खंडित नहीं हुआ।