पूर्ण ठहराव (Total Standstill)
दूसरा सायरन बजते ही 52 सेकंड के लिए कोई भी वाहन या पैदल यात्री अपनी जगह से नहीं हिलेगा। सभी को सावधान मुद्रा (Attention) में खड़ा होना अनिवार्य है।
तिरंगा चौक का आयोजन केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि समय की पाबंदी और अनुशासन का सबसे कड़ा उदाहरण है। मौसम चाहे कैसा भी हो— आंधी, बारिश या कड़ाके की ठंड, यह समय-सारिणी 365 दिन (2018 से) अडिग रहती है।
हर दिन एक नए मुख्य अतिथि (आम नागरिक, छात्र, सैनिक आदि) का आगमन होता है। कमेटी सदस्य कार्यक्रम की व्यवस्था और तिरंगे की तैयारी शुरू करते हैं।
9:45 पर नागरिकों को सतर्क करने के लिए पहला सायरन बजता है। 9:55 पर अतिथि का माल्यार्पण होता है और चौक पर देशभक्ति गीत गूंजने लगते हैं।
ठीक 10:00 बजे दूसरा सायरन (17 सेकंड) बजता है, जो ट्रैफिक रुकने का संकेत है। तिरंगा फहराया जाता है और पूरा चौक 52 सेकंड के लिए राष्ट्रगान में लीन हो जाता है।
राष्ट्रगान के बाद "भारत माता की जय" के उद्घोष के साथ ट्रैफिक पुनः शुरू होता है और अजीत नगर बाजार के दुकानदार अपनी दुकानें खोलते हैं।
इस ऐतिहासिक आयोजन की गरिमा बनाए रखने के लिए कुछ बुनियादी, लेकिन बेहद सख्त नियम (Protocols) तय किए गए हैं, जिनका पालन हर नागरिक स्वेच्छा से करता है।
दूसरा सायरन बजते ही 52 सेकंड के लिए कोई भी वाहन या पैदल यात्री अपनी जगह से नहीं हिलेगा। सभी को सावधान मुद्रा (Attention) में खड़ा होना अनिवार्य है।
राष्ट्रगान के दौरान किसी भी प्रकार की बातचीत, फ़ोन का उपयोग, या हूटिंग सख्त मना है। यह समय केवल राष्ट्र वंदना के लिए समर्पित है।
अजीत नगर बाज़ार का हर दुकानदार 10:02 बजे राष्ट्रगान समाप्त होने और 'भारत माता की जय' के जयघोष के बाद ही अपनी दुकान का शटर उठाता है।
तिरंगा चौक का सबसे कठोर नियम है— समय की पाबंदी (Punctuality)। 2018 से लेकर आज तक, कभी ऐसा नहीं हुआ कि राष्ट्रगान 10:01 पर हुआ हो। ठीक 10:00 बजे, बिना किसी अपवाद के, यह आयोजन शुरू होता है। यह 32 मिनट का अनुशासन हमें यह सिखाता है कि अगर हम 1 मिनट के लिए अपने देश को समय नहीं दे सकते, तो राष्ट्र निर्माण की बात अधूरी है।